लाहौर की खासियत आज भी हमेशा रही हैं उसकी इतिहास भरी मैलेगलियों जो जीवित बस्तयों के रूप में हमारे साथ रहती हैं। भाग 1 में हमने मसूरी बाबा की त्रिशला के आंगन में रहते हुए पुराने ज़माना की महफिलें तथा मेले के जीवन बयान किए थे। अब में, हमारी कहानी थोड़ा आधुनिक टच के साथ जारी रहती है — जहां एक ऐसी विचित्र घटना घटती है जिसे मेहमान अक्सर "उल्लू फिक्स" कहते फिरते हैं।