निर्देशन का टोन व्यक्तिगत-ड्रामा और संवेदनशील दृश्यों के मिश्रण में रहता है। तकनीकी पक्ष — सिनेमैटोग्राफी और एडिटिंग — सीमित बजट के बावजूद श्रेय के योग्य हैं; कैमरा व प्रकाश व्यवस्था क्लोज़-अप और इंटिमेट मूड बनाने पर ध्यान देती हैं।